मछली पालन कैसे शुरू करेें ?

मछली पालन का बिज़नेस एक आजकल कमाई का बहुत बड़ा जरिया बन गया है.  प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है और आज पूरे भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में किसकी काफी डिमांड है और लगातार बढ़ती ही जा रही है.यह बिजनेस काफी तेजी से बढ़ रहा है और लोगों के लिए बिजनेस के नए रास्ते तैयार कर रहा है.  भारत मछली उत्पादन में दूसरे नंबर पर है. इसलिए यह व्यवसाय आपको बहुत ही मुनाफा दे सकता है.

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मछली पालन के फायदे

इस बिज़नेस के बहुत से फायदे हैं जैसे

1 . मछली पालन के एक छोटे से तालाब या पोखर में आसानी से कर सकते हैं. इसके लिए आपको बड़ी जगह की आवश्यकता नहीं है.

2 . तालाब की जगह सीमेंट की गोलाकार टंकी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.

3 . मछली पालन के बिजनेस में आप आपको ज्यादा भागदौड़ करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है क्योंकि यह एक ही जगह पर रहती हैं.

4 . मछली पालन की ट्रेनिंग लेने के बाद ऑफिस को आसानी से शुरू कर सकते हैं.

५ . इस बिजनेस को शुरू करते ही 4 से 6 महीने में आपकी इनकम शुरू हो जाती है क्योंकि इस दौरान मछलियों का वेट 2  से 5 किलोग्राम तक बढ़ जाता है.

6 . इस बिजनेस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी डिमांड इसमें मौजूद प्रोटीन की वजह से ज्यादा है.

७ . आपको मछली पालन के लिए सरकार की तरफ से आसानी से लोन भी मिल जाता है.

८ . भारत की जलवायु मछली पालन के अनुकूल है जिससे आपको किसी नुकसान की कम ही गुंजाइश होती है.

९ . इसकी मांग कभी कम नहीं होती है. जल्दी इनकम के लिए आप मछलियों की जल्दी बड़ी होने वाली नस्ल का चुनाव कर सकते हैं.

मछली पालन के लिए तालाब प्रबंधन व देखभाल

मछली पालन के लिए आपको तालाब के प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा तालाब की तैयारी आप बरसात से पहले कर लें. तालाबों में मांसाहारी मछली जो कि पाली जाने वाली मछलियों को खा जाती हैं, उनको जाल लगा कर निकाल देना चाहिए और अगर आप सीमेंट की टंकी का प्रयोग कर रहे हैं तो उसकी आवश्यकता नहीं पड़ती है.

कीड़े मकोड़ों को मारने के लिए महुआ खली का प्रयोग करना चाहिए.महुआ खली से पानी में मौजूद कीटाणु व कीड़े मकोड़े मर जाते हैं. संचयन के समय मछली के बीज का आकार कम से कम 30 से 40 सेंटीमीटर होना चाहिए और उसका वजन कम से कम 50 ग्राम होना चाहिए.  संचयन के बाद आप उसकी देखभाल किस तरह करते हैं,  आपका उत्पादन उसी पर निर्भर करता है.   इसके लिए आपको कुछ बातों पर ध्यान देना होगा.1 . ऊपरी आहार प्रबंधन2 .उर्वरक प्रबंधन

ऊपरी आहार प्रबंधन का मछली पालन करने में महत्वपूर्ण स्थान है. मछली को आहार के रूप में आप चावल की भूसी और सरसों की खली को आपस में बराबर मात्रा में मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. आप चाहे तो मार्केट में मिलने वाली फीड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.  मछलियों की एक क्रॉप में कम से कम 9 से 10 टन आहार की आवश्यकता पड़ती है.  आपको यह भी ध्यान देना होगा कि उर्वरक का प्रयोग कब और कैसे करना है.उर्वरक डालने से 2 दिन पहले चूने का प्रयोग करना चाहिए. उसके 15 दिन बाद एक बार जैविक खाद और 15 दिन बाद रासायनिक खाद देनी चाहिए.अगर तालाब का पानी ज्यादा हरा हो जाए तो उसे महीने  रासायनिक खाद का प्रयोग बंद कर दें.  आपको हर माह जाल चलाकर मछलियों की वृद्धि,  उनके स्वास्थ्य का निरीक्षण करना चाहिए. यदि कोई बीमारी दिखे  तो फौरन उपचार करना चाहिए.  इस तरह अगर आप मछली पालन करते हैं तो, आप इस बिजनेस में बहुत मुनाफा मिल सकता है.

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